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 THE FIT HEART 

The Way To A Healthy Heart

उच्च रक्तचाप (हाई बी.पी.)

रक्तचाप क्या है?

रक्तचाप, आपके  रक्त वाहिकाओं (धमनियों) में रक्त के दबाव को कहते है। रक्तचाप ‘पारे के मिलीमीटर’ (mmHg) में मापा जाता है। आपका रक्तचाप दो आंकड़ों  के रूप में दर्ज किया जाता है। उदाहरण के लिए, 130/80 mmHg। यह 130 बटा 80 mmHg के रूप में पढ़ा जाता है।

पहला नंबर सिस्टोलिक दबाव है। यह धमनियों में रक्त का वह दबाव है जो की दिल के सिकुड़ने के समय होता है।

दूसरा नंबर डायस्टोलिक दबाव है। यह धमनियों में रक्त का वह दबाव है जो की तब बनता है जब दिल दो सिकुड़न के बीच विश्राम करता है।

 

उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशनक्या है?

एक जब रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) हर बार 140/90 mmHg या घर पर मापा गया ब्लड प्रेशर हमेशा 135/85 mmHg से अधिक रहता है तब इस अवस्था को उच्च रक्तचाप कहते है।

                                                                       

 

उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) का निदान कैसे होता है?

सिर्फ एक बार रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) ज़्यादा मिलने का यह मतलब नहीं है कि आपको 'उच्च रक्तचाप' है। एक निरोगी व्यक्ति का भी रक्तचाप दिन भर में बदलता रहता है। यदि आप चिंतित हैं, परेशान हैं  या व्यायाम कर रहे हैं तब भी, बिना उच्च रक्तचाप की बीमारी के, आपका रक्तचाप कुछ देर के लिए बढ़ सकता है।  आपमें उच्च रक्तचाप की बीमारी है, यह तब कहा जा सकता है जब आपमें कई बार और विभिन्न अवसरों पर लिया गया रक्तचाप या ब्लड प्रेशर हमेशा ऊँचा रहता हो , ख़ासकर जब यह विश्रांति की अवस्था में मापा जाए

इस  बीमारी में एक लंबे समय तक (यहां तक कि कई वर्षों तक) ,रोगी को कोई शिकायत नहीं रहती है। लक्षण (शिकायतों) के आधार पर जब उच्च रक्तचाप का निदान होता है, तब तक आमतौर पर बहुत देरी हो जाती है। कई बार मरीज में उच्च रक्तचाप की पहली प्रस्तुति किसी बड़े दुष्प्रभाव (जैसे लकवा, दिल का दौरा इत्यादि) के रूप में हो सकती है। उच्च रक्तचाप के लक्षण और दुष्प्रभाव नीचे चित्र में दिए गए हैं:

            

 

उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) क्यों होता है?

अधिकांश मामलों में उच्च रक्तचाप का कारण पता नहीं चलता है। इसे प्राथमिक उच्च रक्तचाप कहते है। ऐसा माना जाता है कि धमनियों में संकुचन के कारण रक्त प्रवाह को प्रतिरोध बढ़ जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इसके कई कारण हो सकते है।

कुछ मामलों में रक्तचाप शरीर के अन्य अंगों के रोगों के परिणामस्वरूप होता है जैसे थायराइड का रोग, गुर्दे की बीमारी आदि। इसे सेकंडरी  उच्च रक्तचाप कहते है।

किसके ब्लड प्रेशर की जांच होनी चाहिए?

उच्च रक्तचाप से आम तौर पर मरीज़ को कोई शिकायत नहीं होती है। कई बार आप अपने रक्तचाप की जाँच किये बगैर यह नहीं जान पाएंगे कि आपको उच्च रक्तचाप है या नहीं। इसलिए, हर किसी को, विशेष रूप से 40 साल की उम्र के बाद, कम से कम हर पांच साल में एक बार नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक करवाना चाहिए। निम्नलिखित परिस्तिथियों इससे भी अधिक बार (कम से कम एक वर्ष में एक बार) ब्लड प्रेशर चेक होना चाहिए:

  • बुज़ुर्ग लोग।
  • जिनमें पहले कभी उच्च रक्तचाप मिला हो (140/90 mmHg या उससे ज़्यादा)
  • जिनमें पहले 130/85 mmHg और 139/89 mmHg के बीच मिला हो।
  • मधुमेह, हृदय रोग, गुर्दा रोग, थायराइड रोग इत्यादि के मरीज़।
  • जिनके परिवार में उच्च रक्तचाप के रोगी हो।

 

उच्च रक्तचाप चिंता का विषय क्यों है?

उच्च रक्तचाप में लंबे समय तक कोई भी लक्षण नहीं होते हैं। इसका मतलब है कि यह एक लंबे समय तक बिना ध्यान में आए, शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है। ये नुकसान दिल , गुर्दे और यहां तक कि मस्तिष्क को क्षति के रूप में हो सकता है। कभी कभी यह काफी गंभीर हो सकता है और मरीज को पहला लक्षण दिल का दौरा, दिल की विफलता (हार्ट फेल्योर), लकवा आदि हो सकता है। और इसलिए नियमित बीपी की जांच,विशेष रूप से अधिक जोखिम वाले व्यक्तियों में  (जैसा कि ऊपर बताया गया है), अत्यन्त आवश्यक है।

                                                                            


ईलाज

जीवन शैली में बदलाव 

  • वजन कम करें (अगर आप मोटापे के शिकार हैं)
  • नियमित शारीरिक गतिविधि / व्यायाम
  • एक स्वस्थ आहार (कम वसा/तेल/घी ,ज़्यादा फल/सब्जियां, मछली का सेवन आदि) खाओ
  • नमक का कम इस्तेमाल 
  • कॉफी / चाय का सीमित सेवन 
  • धूम्रपान छोड़ें 
  • शराब का सीमित सेवन 

 

दवाईयाँ 

उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए कई दवाएं हैं। आपके लिए उचित औषधि का चुनाव निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है:

  • आपको मधुमेह, गुर्दे की बीमारी आदि जैसे अन्य रोग है या नहीं। 
  • क्या आप कोई अन्य दवा ले रहे है जो कि ब्लड प्रेशर की किसी दवा के साथ लेने से नुकसान पहुँचा सकती है।
  • ब्लड प्रेशर की दवा के संभावित दुष्प्रभाव (साइड इफेक्टस)।
  • अापकी अायु।

 

दवाई कितने समय तक लेनी है..??

जवाब है - अधिकांश मामलों में जीवन भर। हालांकि कुछ रोगियों में जिनमें उच्च रक्तचाप शरीर के दूसरे अंग की बीमारी के परिणामस्वरूप हुआ है (सेकंडरी  उच्च रक्तचाप), उनमें इस रोग पर नियंत्रण करने से ब्लड प्रेशर (बी.पी.) की दवा का डोज़ कम हो सकता हैं; यहां तक कि ब्लड प्रेशर की दवाओं को बंद किया जा सकता है। बहुत ही कम मामलों में कभी-कभी प्राथमिक उच्च रक्तचाप में भी , आपके डॉक्टर बी.पी. की दवाएं पूरी तरह बंद कर सकते है।

 

बी.पी. का लक्ष्य क्या होना चाहिए ??

ज्यादातर लोग में, जिनमे दूसरे रोग नहीं है उनमे बी.पी. नियंत्रण का लक्ष्य 140/90 mmHg या इससे कम होता है।

कुछ लोगों में (जैसे मधुमेह रोगी, गुर्दे की बीमारी के रोगी आदि),  बी.पी. नियंत्रण का लक्ष्य इससे भी कम होता है।