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 THE FIT HEART 

The Way To A Healthy Heart

जन्मजात हृदय के रोग (सीएचडी, CHD)

ये दिल की वे बीमारियाँ हैं जिनमें दिल के विकास में गड़बड़ी के कारण दिल की बनावट में दोष या गड़बड़ियाँ हो जाती हैं। इनमें दिल के एक या एक से अधिक भागों का या उसकी प्रमुख वाहिकाओं का दोषपूर्ण विकास होता है (जैसे आवश्यकता से अधिक विकास, कम विकास या  विकृत विकास इत्यादि)। इनमे दो प्रकार होते है: रक्त में ऑक्सीजन की उचित मात्रा वाले मरीज़ (एसायनोटिक सीएचडी, Acyanotic CHD) या रक्त में ऑक्सीजन की कम मात्रा वाले मरीज़ (सायनोटिक सीएचडी, Cyanotic CHD)। 

प्रकार :

साइनोटिक:
  • फैलोट्स टेट्रालॉजी 
  • ट्रांसपोसिशन अॉफ ग्रेट आर्टरीज 
  • ट्राईकस्पिड अट्रेजिया : ट्राईकस्पिड वाल्व का ना होना 
  • टोटल अनोमलस पल्मोनरी वेनस कनेक्शन : चारों पल्मोनरी नसें गलत जगहों पर होती हैं
  • परसिस्टेंट ट्रंकस अर्टेरीओसिस 
  • हाइपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट: दिल का बांयां हिस्सा अविकसित होता है 
  • पल्मोनरी  अट्रेजिया: पल्मोनरी वाल्व का न होना 
  • एब्सटैन  विकार 
 
एसायनोटिक:
  • वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट 
  • एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट 
  • पेटेंट डकटस आर्टरियोसस 
  • कंजेनिटल एओर्टिक स्टेनोसिस 
  • पल्मोनरी  स्टेनोसिस 
  • कोआर्कटेशन ऑफ एओर्टा 
  • एट्रिओ वेंट्रिकुलर कनाल डिफेक्ट 

इन हृदय विकारों का ब्यौरा काफी तकनीकी और पेचीदा है। अगर कोई पाठक इन्हे ज़्यादा गहराई से जानना चाहते हैं तो कृपया मुझे ASK THE EXPERT (विशेषज्ञ को पूछे) फॉर्म भरकर संपर्क करें।

 

प्रबंधन और ईलाज  
  • जन्मजात हृदय रोग के  कुछ मरीजों को किसी विशिष्ट उपचार की आवश्यकता नही पड़ती है, लेकिन उन्हें इंफेक्टिव एंडोकार्डाइटिस (दिल का इंफेक्शन या संक्रमण) का खतरा हो सकता है।
  • गंभीर रूप से बीमार मरीजों को जान का खतरा हो सकता है  और उन्हें  तत्काल अस्पताल में इलाज की आवश्यकता पड़ सकती है
  • अगर हृदय मे विकार इतना ज़्यादा है कि शरीर के रक्त संचलन या रक्त मे ऑक्सीजन की मात्रा पर बुरा प्रभाव पड़ रहा हो या फिर हृदय या फेफड़ों पर दबाव पड़ रहा हो, तब शल्य चिकित्सा या अॉपरेशन इकी आवश्यकता पड़ सकती है।
  • अत्यंत  गंभीर परिस्थितियों  (उदाहरण के लिए हैपोप्लास्टिक दिल, जिसमे दिल के कमरे पूरी तरह बन नही पातें है) में हृदय प्रत्यारोपण (पुराना हृदय निकालकर नया हृदय लगाना) की आवश्यकता हो सकती है।
  • कौन सा ईलाज (परेशन या सिर्फ दवा इत्यादि) करना पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हृदय मे विकार कौन सा है और कितना है। कुछ हृदय के विकारों को छाती खोलकर परेशन के बजाए कमर मे केवल एक छोटे छेद के ज़रियें भी ठीक किया जा सकता है।